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26 फरवरी को महाशिवरात्रि है। हम आपको इस पर्व से जुड़ी 5 बातें बता रहे हैं। इसमें शिव पूजन के लिए चार प्रहर के मुहूर्त और उज्जैन, काशी, केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के मुख्य पुजारियों की बताई पूजा विधि है। जानिए शिवरात्रि क्यों मनाते हैं, महामृत्युंजय मंत्र कैसे बना और इस मंत्र पर हुए रिसर्च के बारे में।
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शिव विवाह नहीं शिवलिंग के प्रकट होने का दिन है महाशिवरात्रि महाशिवरात्रि को लेकर मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, लेकिन शिव पुराण सहित किसी भी ग्रंथ में इस बात का कोई जिक्र ही नहीं है।
शिव पुराण में लिखा है कि फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष के चौदहवें दिन यानी चतुर्दशी तिथि पर पहली बार शिवलिंग प्रकट हुआ था। तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने शिवलिंग की पूजा की। इसी दिन को शिवरात्रि कहा गया।
शिव पुराण के 35वें अध्याय में लिखा है कि शिव विवाह अगहन महीने के कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन हुआ था। ये तिथि इस साल 7 नवंबर को आएगी।
शिवरात्रि पर शिव विवाह मनाने की परंपरा कब से शुरू हुई इस बारे में लिखित जानकारी नहीं है। काशी और उज्जैन के विद्वानों का कहना है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में पार्वती का भी स्थान होता है। शिवरात्रि पर महादेव की पूजा रात में होती है। पार्वती के बिना शिव पूजन अधूरा रहता है, इसलिए इस रात को शिव-शक्ति मिलन के पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।
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